जब हम छोटे थे, हमारी दुनिया बस माँ की गोद में सिमटी रहती थी। उसी गोद ने हमें चलना सिखाया, बोलना सिखाया, और मुश्किलों से लड़ने की ताक़त दी। माँ की झिड़की में भी प्यार छिपा होता था और पापा की सख़्ती में भी हमारा भविष्य सुरक्षित करने की चिंता।
लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हालात बदलने लगते हैं।
बच्चे बड़े होकर अपनी पढ़ाई, नौकरी और परिवार में व्यस्त हो जाते हैं। धीरे-धीरे घर के बुज़ुर्ग किनारे कर दिए जाते हैं—कभी अनजाने में, तो कभी जान-बूझकर।
अकेलेपन का बोझ
आज के समय में कई बुज़ुर्ग अपने ही घर में अजनबी-से महसूस करते हैं। उनका दिन एक ही सवाल में गुजरता है—”क्या आज कोई मुझसे बात करेगा?” दीवारों से बातें करना और पुरानी तस्वीरों से दिल बहलाना उनकी दिनचर्या बन जाती है।
वो हाथ, जिन्होंने कभी हमें गिरने नहीं दिया, अब खुद काँपते हुए सहारे की तलाश में हैं। वो आँखें, जिन्होंने हमारे सपनों को चमकते देखा, अब उम्मीदों की रोशनी ढूँढ रही हैं।
स्मृतियों का सहारा
अधिकतर बुज़ुर्ग अपने बीते हुए सुनहरे पलों में जीते हैं।
दादी को अब भी याद है कि किस तरह उन्होंने हर त्यौहार पर पूरे परिवार को एक साथ बैठाकर खाना खिलाया।
दादा जी आज भी पुराने रेडियो पर बजते गीतों को सुनते-सुनते उन दिनों में लौट जाते हैं जब पूरा परिवार उनके इर्द-गिर्द बैठा करता था।
यादें भले ही साथ देती हैं, पर दिल के खालीपन को भर नहीं पातीं।
बुज़ुर्गों का असली खज़ाना
अगर हम ध्यान से सुनें, तो हर बुज़ुर्ग एक किताब की तरह हैं। उनके अनुभव, उनकी कहानियाँ, उनकी सीख—यह सब हमारे जीवन को दिशा देने वाली धरोहर है।
दुर्भाग्य यह है कि अक्सर हम उनके साथ बैठने का समय ही नहीं निकाल पाते।
हमें क्या करना चाहिए?
बुज़ुर्गों को पैसे, बड़े घर या महंगे सामान की नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान की ज़रूरत होती है।
रोज़ उनसे कुछ पल बात कीजिए।
उनके अनुभवों को सुनिए।
उन्हें महसूस कराइए कि वे अकेले नहीं हैं।
कभी-कभी केवल एक मुस्कान, एक नमस्ते, या उनके साथ बैठकर चाय पी लेना ही उनके दिन को खुशनुमा बना देता है।
अंतिम विचार
जीवन का सफ़र तब पूरा होता है जब बुज़ुर्गों को वह स्थान मिले, जिसके वे हक़दार हैं। माँ की गोद से शुरू हुआ यह सफ़र अगर वृद्धाश्रम तक पहुँचता है, तो हमें यह सोचने की ज़रूरत है कि हमने कहाँ गलती की।
क्योंकि आज वे अकेले हैं, कल शायद हम भी हों।
अगर हम अपने बुज़ुर्गों को प्यार और सम्मान देंगे, तभी आने वाली पीढ़ी भी हमारे लिए यही करेगी।




